Wednesday, November 3, 2010

Deepotsav ki Anant Shubhkamnaen

प्रियवर,

दीपपर्व की इस शुभ वेला में आपका स्मरण मेरे लिए अत्यंत सुखद है | यह दीपोत्सव आपको सर्वविध सम्पन्न करे |
इस नवगीत के माध्यम से मेरा हार्दिक अभिनंदन स्वीकारें -


दीप जले  



दीप जले
माटी का दीप जले
घर-घर में दीप जले  

आँगन में चौखट पर
खिड़की-दरवज्जे पर 
झोंपड में 
शाह की हवेली के छज्जे पर 

दीप जले 
नदी-पार के 
खण्डहर में दीप जले 

गली-गली 
नेह-राग गूंजे फिर साँझ-ढले 
जोत जले 
अम्मा के आँचल की छाँव-तले 

दीप जले 
देवी के चौरे की 
जगहर में दीप जले 

हर कोने-अतरी में 
कमरे में- जीने पर 
परबत की चोटी पर 
सागर के सीने पर 

दीप जले 
काशी में दीप जले 
मगहर में दीप जले          



स्नेह-नमन सहित,

आपका

कुमार रवीन्द्र  


 

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