दीपपर्व की इस शुभ वेला में आपका स्मरण मेरे लिए अत्यंत सुखद है | यह दीपोत्सव आपको सर्वविध सम्पन्न करे |
इस नवगीत के माध्यम से मेरा हार्दिक अभिनंदन स्वीकारें -
दीप जले
दीप जले
माटी का दीप जले
घर-घर में दीप जले
आँगन में चौखट पर
खिड़की-दरवज्जे पर
झोंपड में
शाह की हवेली के छज्जे पर
दीप जले
नदी-पार के
खण्डहर में दीप जले
गली-गली
नेह-राग गूंजे फिर साँझ-ढले
जोत जले
अम्मा के आँचल की छाँव-तले
दीप जले
देवी के चौरे की
जगहर में दीप जले
हर कोने-अतरी में
कमरे में- जीने पर
परबत की चोटी पर
सागर के सीने पर
दीप जले
काशी में दीप जले
मगहर में दीप जले
स्नेह-नमन सहित,
आपका
कुमार रवीन्द्र
सुंदर अभिव्यक्ति
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